ग्लोबल स्टार Priyanka Chopra आज भले ही इंटरनेशनल रेड कार्पेट की क्वीन मानी जाती हैं, लेकिन अपने करियर के शुरुआती दिनों में वह फैशन से जुड़ी कई मुश्किलों से गुज़री हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान प्रियंका ने अपने शुरुआती दिनों के कुछ ऐसे दिलचस्प किस्से साझा किए, जिन्हें सुनकर उनके फैंस भी हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि कभी-कभी फैशन संभालने के लिए उन्हें अजीबोगरीब जुगाड़ तक करने पड़े थे।
च्युइंग गम से संभाली थी ड्रेस की मुश्किल
पॉडकास्ट ‘गोइंग रॉग’ के दौरान बातचीत में प्रियंका चोपड़ा ने अपने कुछ अनोखे फैशन हैक्स साझा किए। उन्होंने बताया कि एक बार कार से उतरते समय उनकी शर्ट बीच से खुल रही थी और उस समय उनके पास उसे ठीक करने का कोई साधन नहीं था। ऐसे में उन्होंने तुरंत च्युइंग गम का इस्तेमाल किया और उससे शर्ट को चिपका लिया ताकि कैमरों के सामने कोई असहज स्थिति न बने।
प्रियंका ने इस दौरान एक और दिलचस्प टिप भी दी। उन्होंने कहा कि अगर कभी डबल साइड टेप उपलब्ध न हो, तो साधारण बैंड-एड को गोल घुमाकर भी फैशन टेप की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके मुताबिक, कई बार छोटे-छोटे जुगाड़ ही बड़े मौके पर काम आ जाते हैं।
कैब की पिछली सीट पर खुद ही कर ली थी पियर्सिंग
बातचीत के दौरान प्रियंका ने अपने युवावस्था के दिनों को याद करते हुए एक और चौंकाने वाला किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि 90 के दशक में वह फैशन के मामले में काफी एक्सपेरिमेंट करती थीं। उस दौर में फ्लेयर्ड जींस, क्रॉप टॉप और बेली बटन पियर्सिंग का चलन काफी लोकप्रिय था और उन्हें भी इसका खास शौक था।
प्रियंका ने बताया कि एक बार उन्होंने कैब की पिछली सीट पर बैठकर खुद ही अपनी बेली बटन पियर्सिंग दोबारा कर ली थी। उन्होंने कहा कि उस समय वह पूरी तरह फैशन एक्सपर्ट नहीं थीं, लेकिन उन्हें यह जरूर पता था कि उन पर क्या अच्छा लगता है।
मिस वर्ल्ड मंच पर भी अपनाया था ‘नमस्ते’ वाला जुगाड़
साल 2000 में जब Miss World 2000 का खिताब जीतने के लिए प्रियंका मंच पर थीं, तब भी उन्होंने एक स्मार्ट जुगाड़ का सहारा लिया था। उन्होंने बताया कि स्टेज पर उनका गाउन फिसलने लगा था, जिसे संभालने के लिए उन्होंने ‘नमस्ते’ वाला पोज़ बना लिया।
इस दौरान उन्होंने अपने हाथों की स्थिति से गाउन को संभाले रखा और बड़ी सहजता से मंच पर खड़ी रहीं। प्रियंका के मुताबिक, ग्लैमर की दुनिया में कदम रखते ही उन्हें बहुत कम उम्र में परिपक्व होना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस समय दबाव इतना ज्यादा था कि किसी भी तरह की गलती की गुंजाइश नहीं होती थी।
